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22.07.2026 10:20 AM
EUR/USD का अवलोकन: 22 जुलाई — बाजार पूरी तरह अनिश्चितता के दौर में

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मंगलवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी में कोई विशेष या उल्लेखनीय गतिविधि देखने को नहीं मिली। कुछ विशेषज्ञ मौजूदा कीमतों के उतार-चढ़ाव को जिस तरह समझाने की कोशिश कर रहे हैं, उसे देखकर मुस्कुराहट आ जाती है, क्योंकि इन हलचलों को केवल "ऐंठन (Convulsions)" कहा जा सकता है।

लगभग हर दिन इस मुद्रा जोड़ी की अस्थिरता (Volatility) न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच जाती है, जो केवल एक बात का संकेत देती है—फिलहाल बाजार में ट्रेडिंग करने की कोई खास इच्छा नहीं है।

इसका सबसे तार्किक कारण मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष, तेल की कीमतों, महंगाई (Inflation) और इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को लेकर बनी पूरी अनिश्चितता है।

हाल के सप्ताहों में बाजार की चाल को मुख्य रूप से तीन बिंदुओं में समझा जा सकता है।

1. करेक्शन (Correction)

अमेरिकी डॉलर में तेज़ मजबूती के बाद एक तकनीकी सुधार (Correction) आना स्वाभाविक था। यह बात 4-घंटे (4H) के चार्ट पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

इसी वजह से पिछले कुछ सप्ताहों में यूरो केवल तकनीकी कारणों से धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा है। बाजार ने शॉर्ट पोज़िशनों से मुनाफावसूली (Profit Booking) तो की है, लेकिन नई लॉन्ग पोज़िशन खोलने में कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई है।

यही कारण है कि वर्तमान में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी कम हैं।

2. फ्लैट (Flat / Range-bound Market)

हालांकि हालिया चाल में हल्की ऊपर की ओर ढलान (Upward Bias) दिखाई देती है, लेकिन कीमत अधिकांश समय 1.1377 से 1.1461 के दायरे में ही बनी हुई है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को करेक्शन भी कहा जा सकता है और रेंज-बाउंड (Flat) बाजार भी। दोनों ही स्थिति में निष्कर्ष एक जैसा ही रहता है।

3. बाजार का शोर (Market Noise)

चूंकि अधिकांश गतिविधियां बहुत कमजोर हैं, इसलिए हमें नहीं लगता कि वे किसी बड़ी आर्थिक या राजनीतिक खबर पर बाजार की वास्तविक प्रतिक्रिया हैं।

उदाहरण के लिए, यदि अमेरिका की महंगाई (Inflation) पर कोई बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट आए और उसके बाद कीमत केवल 20 पिप्स ही बढ़े या घटे, तो क्या इसे बाजार की वास्तविक प्रतिक्रिया कहा जा सकता है?

हमारी राय में नहीं।

अधिकांश समय हम 20–30 पिप्स की ऐसी हलचल देखते हैं, जो मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों या बुनियादी (Fundamental) कारणों के बिना भी सामान्य रूप से हो सकती है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष सरल है, हालांकि हर कोई इससे सहमत नहीं होगा।

मौजूदा तेजी केवल एक तकनीकी करेक्शन है, और जैसे ही यह पूरा होगा, मुख्य ट्रेंड दोबारा शुरू हो सकता है।

हम यह नहीं मानते कि अमेरिकी डॉलर में आगे और बड़ी मजबूती निश्चित है, लेकिन यह भी सच है कि एक महीने पहले भी डॉलर के पास केवल दो दिनों में लगभग 300 पिप्स की तेजी के पर्याप्त मौलिक कारण नहीं थे।

बाजार अक्सर तर्कहीन (Illogical) चाल चलता है और ऐसा पहले भी कई बार हुआ है।

फिलहाल 4-घंटे के चार्ट पर तकनीकी तस्वीर यह संकेत दे रही है कि पिछले तीन महीनों से चल रहे ट्रेंड का एक नया चरण शुरू होने की तैयारी हो रही है।

इसके अलावा, इस सप्ताह यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की बैठक भी होने वाली है। ऐसी संभावना कम है कि बैंक लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में वृद्धि करेगा।

वहीं, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Risks) अभी भी नकारात्मक बने हुए हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को कुछ समर्थन मिल सकता है।

यानी यदि बाजार डॉलर खरीदना चाहे, तो उसके लिए औपचारिक कारण मौजूद हैं—या फिर आसानी से ढूंढ़े जा सकते हैं।

एक बार फिर याद रखें—करेक्शन आमतौर पर धीमे, लंबे और थकाऊ होते हैं, जबकि ट्रेंड तेज़, मजबूत और स्पष्ट होते हैं।

जो गतिविधि इस समय बाजार में दिखाई दे रही है, वह किसी मजबूत ट्रेंड जैसी बिल्कुल नहीं लगती।

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22 जुलाई तक पिछले 5 ट्रेडिंग दिनों में EUR/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Volatility) 45 पिप्स रही है, जिसे "कम (Low)" श्रेणी में रखा गया है।

बुधवार को इस मुद्रा जोड़ी के 1.1366 से 1.1456 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

लिनियर रिग्रेशन (Linear Regression) का ऊपरी चैनल नीचे की ओर संकेत कर रहा है, जो गिरावट वाले ट्रेंड (Downtrend) के जारी रहने का संकेत देता है।

वहीं, CCI (Commodity Channel Index) संकेतक ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और इसने दो बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergences) बनाए हैं, जो गिरावट वाले ट्रेंड के समाप्त होने और संभावित तेजी की शुरुआत का संकेत दे सकते हैं।

निकटतम सपोर्ट स्तर (Support Levels)

  • S1: 1.1414
  • S2: 1.1353
  • S3: 1.1292

निकटतम रेजिस्टेंस स्तर (Resistance Levels)

  • R1: 1.1475
  • R2: 1.1536
  • R3: 1.1597

ट्रेडिंग सुझाव

EUR/USD फिलहाल गिरावट वाले ट्रेंड में बना हुआ है, हालांकि यह संभवतः दीर्घकालिक वैश्विक तेजी (Global Uptrend) के भीतर एक तकनीकी करेक्शन है। यह बात डेली (Daily) और वीकली (Weekly) चार्ट पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

डॉलर के लिए वैश्विक मौलिक (Fundamental) स्थिति अभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। हालांकि, 2026 में पहले भू-राजनीतिक घटनाक्रम और उसके बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के आक्रामक (Hawkish) रुख ने डॉलर को मजबूत समर्थन दिया है।

यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के नीचे बनी रहती है, तो शॉर्ट (Sell) पोज़िशन पर विचार किया जा सकता है, जिनके लक्ष्य 1.1366 और 1.1353 होंगे।

यदि कीमत मूविंग एवरेज के ऊपर निकल जाती है, तो लॉन्ग (Buy) पोज़िशन उचित मानी जा सकती है, जिनके लक्ष्य 1.1456 और 1.1475 होंगे।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि बाजार लगातार चौथे सप्ताह भी सीमित दायरे (Flat / Range-bound) में कारोबार कर रहा है।

चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों का अर्थ

  • लिनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels):
    ये वर्तमान ट्रेंड की दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो इसका अर्थ है कि ट्रेंड मजबूत है।
  • मूविंग एवरेज (Moving Average – सेटिंग: 20,0, Smoothed):
    यह अल्पकालिक ट्रेंड की दिशा बताता है और वर्तमान में किस दिशा में ट्रेडिंग करनी चाहिए, इसका संकेत देता है।
  • मरे लेवल्स (Murray Levels):
    ये संभावित लक्ष्य (Target) और करेक्शन (Correction) के महत्वपूर्ण स्तर होते हैं।
  • वोलैटिलिटी लेवल्स (लाल रेखाएं):
    वर्तमान अस्थिरता के आधार पर यह अनुमान लगाते हैं कि अगले ट्रेडिंग दिन कीमत किस दायरे में रह सकती है।
  • CCI (Commodity Channel Index):
    जब CCI -250 से नीचे चला जाता है, तो यह ओवरसोल्ड (Oversold) स्थिति का संकेत देता है, जबकि +250 से ऊपर जाने पर ओवरबॉट (Overbought) स्थिति मानी जाती है। दोनों ही स्थितियां अक्सर ट्रेंड में संभावित बदलाव (Trend Reversal) का संकेत देती हैं।

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