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वॉल स्ट्रीट सुस्त चैटबॉट मुनाफे से हतोत्साहित है

वॉल स्ट्रीट सुस्त चैटबॉट मुनाफे से हतोत्साहित है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर पूंजीगत खर्च और उससे मिलने वाले वास्तविक लाभ के बीच का अंतर अब गंभीर होता जा रहा है। Goldman Sachs की एक रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक को अभूतपूर्व गति से अपनाने के बावजूद अधिकांश सेक्टरों में वित्तीय रिटर्न अभी भी बहुत कम है।

बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि AI अपनाने वाली 95% कंपनियां अभी तक निवेश पर कोई खास रिटर्न (ROI) दर्ज नहीं कर पाई हैं। हालांकि आम उपभोक्ता AI को इंटरनेट या पर्सनल कंप्यूटर की तुलना में तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन उससे कमाई (monetization) रुक गई है। ज्यादातर यूज़र्स चैटबॉट्स के फ्री वर्ज़न को पसंद करते हैं, जिससे डेवलपर्स की आय सीमित हो जाती है।

इकोसिस्टम में असंतुलन

इस समय इस पूरे चक्र में सबसे ज्यादा मुनाफा चिप बनाने वाली कंपनियां कमा रही हैं। इसके विपरीत, मॉडल डेवलपर्स और क्लाउड प्रोवाइडर्स को भारी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत को सही ठहराने में मुश्किल हो रही है। Goldman Sachs ने इस वैल्यू चेन में असंतुलन को “अस्थिर” बताया है।

कॉर्पोरेट सेक्टर के भीतर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जहां टॉप एग्जीक्यूटिव्स उत्पादकता में बढ़ोतरी की बात करते हैं, वहीं फ्रंटलाइन कर्मचारी वास्तविक समय में बचत महसूस नहीं कर रहे हैं। ज्यादातर कंपनियां अभी तक ऐसे AI उपयोग (use cases) नहीं खोज पाई हैं जो वास्तविक मूल्य जोड़ें, बल्कि कई बार केवल ऑपरेटिंग लागत ही बढ़ा रहे हैं।

FOMO और इंफ्रास्ट्रक्चर जोखिम

बड़ी टेक कंपनियां डेटा सेंटर्स पर खर्च बढ़ाती जा रही हैं, जबकि उनके शेयर प्राइस स्थिर बने हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इसका कारण “FOMO” (Fear of Missing Out) है और प्रतिस्पर्धा में बने रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कॉर्पोरेट डेटा में गहराई से पुनर्गठन और स्पष्ट निवेश रणनीतियों के बिना AI पर खर्च अप्रभावी ही रहेगा। शुरुआती अपनाने वाले (early adopters) को कच्चे (raw) समाधान लागू करते समय ज्यादा लागत का सामना करना पड़ सकता है, जो लंबे समय में अनुपातिक लाभ नहीं देंगे। विशेषज्ञ कंपनियों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं: केवल शक्तिशाली टूल खरीद लेना, मजबूत बिज़नेस लॉजिक की कमी को पूरा नहीं कर सकता।

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